Pic: Peoples Archive of Rural India (@PARInetwork on Facebook)
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» जनता में क्रांति की भरपूर संभावनायें है फिर भी क्रांति नहीं हो रही है क्योंकि जनता में राजनैतिक चेतना का अभाव है। अन्याय और शोषण कभी भी स्वतः विद्रोह में परिवर्तित नहीं होते। शोषण के खिलाफ बगावत केवल तभी सम्भव है जब जनता की राजनैतिक चेतना विकसित हो। यदि जनता में राजनैतिक चेतना का अभाव है तो वह मौन होकर अहिंसक रूप से शोषण को बर्दास्त करती रहेगी। राजनैतिक चेतना के अभाव में कोई भी विद्रोह या क्रांति सम्भव नहीं है। «

ज विश्व के सभी खेमों के विचारक इस बात पर सहमत है कि जनता में क्रांति की संभवनायें पहले से कई गुना ज्यादा है। हम इतिहास के उस मोड़ पर खड़े है जहां से एक नये युग का आरम्भ होना है और हमे पूँजीवाद से आगे जाना है। पूँजीवाद अपनी आयु पूरी कर चुका है। विश्व की सभी अर्थव्यवस्थायें संकट के दौर से गुजर रही है। आर्थिक वृद्धि बहुत पहले ही शून्य हो गयी थी। अब अर्थव्यवस्था में ठहराव को बरकरार करना भी मुश्किल हो रहा है। सभी बड़ी अर्थव्यवस्थायें ठहराव की चुनौती का सामना करने में असफल रही है। वृद्धि दर ऋणात्मक हो गयी है। ऐसी अवस्था में जब पूँजीवाद असफल हो रहा है, समाजवादी क्रांति की सम्भावनायें कई गुना बढ़ जाती है। तकनीकी विकास ने मानव की क्षमताओं को कई गुना बड़ा दिया है। किन्तु हमारे सामने सबसे बड़ा प्रश्न है कि सम्भावना वास्तविकता में क्यों नहीं बदल रही?

जनता में क्रांति की भरपूर संभावनायें है फिर भी क्रांति नहीं हो रही है क्योंकि जनता में राजनैतिक चेतना का अभाव है। अन्याय और शोषण कभी भी स्वतः विद्रोह में परिवर्तित नहीं होते। शोषण के खिलाफ बगावत केवल तभी सम्भव है जब जनता की राजनैतिक चेतना विकसित हो। यदि जनता में राजनैतिक चेतना का अभाव है तो वह मौन होकर अहिंसक रूप से शोषण को बर्दास्त करती रहेगी। राजनैतिक चेतना के अभाव में कोई भी विद्रोह या क्रांति सम्भव नहीं है।

जनता में राजनैतिक चेतना डालना पार्टी का काम होता है। आज पूरी दुनिया में कम्युनिस्ट आंदोलन मात्र इसलिए विफल हुआ क्योंकि कम्युनिस्ट पार्टियां जनता में राजनैतिक चेतना डालने में असफल रही। क्रांति के लिए तीन चीजे आवश्यक है, पार्टी, प्रोग्राम और रणनीति’। इन तीनों में पार्टी की  भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है। प्रोग्राम और रणनीति दोनों पार्टी ही तय करती है। पार्टी क्रांतिकारियों की नर्सरी होती है। क्रांतिकारियों को प्रशिक्षण देना उन्हें रणनीति से लेस करना और जनता के बीच अपने प्रोग्राम का प्रचार करना पार्टी का प्राथमिक कर्तव्य होता है। पार्टी आंदोलन को नेतृत्व प्रदान करती है। क्रांति में पार्टी की केंद्रीय भूमिका होती है।

कम्युनिस्ट पार्टियां अपने संग़ठन और कार्यशैली दोनों में दक्षिण पंथी पार्टियों से अलग होती है। ये समितियों, छोटे-छोटे निकायों और समूहों के माध्यम से जनता से जुड़ी रहती है।

आज बदले हुए परिवेश में जब क्रांति की संभावनायें दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और पूंजीवादी अर्थव्यवस्था नये संकटों में घिरती जा रही है। ऐसी परिस्थिति में कम्युनिस्ट पार्टियों को पुनर्जीवित करके समाजवादी क्रांति द्वारा एक नये समाज की स्थापना करने की सख्त आवश्यकता है। दुर्भाग्यवश कम्युनिस्ट पार्टियां जनता और बुद्धिजीवियों से दूर हो गयी है। आज कल के कम्युनिस्ट भी पार्टी से जुड़ने में घबराते है।

हमारे युवा सहपाठी पार्टी की सदस्यता लेने के बजाय प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में एडमिशन लेने को प्राथमिकता देते है। शिक्षण संस्थानों में सीट बहुत कम होती है और उसकी अपनी सीमायें भी होती है। वामपंथ में रूचि रखने वाले लोगो को शिक्षण संस्थान के बजाय सीधा पार्टी से जुड़ना चाहिये क्योंकि कोई भी संस्थान पार्टी की भूमिका नहीं निभा सकता। पार्टी ही क्रांतिकारियों को उनके दूसरे साथियों और जनता से राजनैतिक रूप से जोड़ती है। पार्टी ही क्रांतिकारियों को संगठित और निर्देशित कर क्रांति के लिए तैयार करती है। किसी भी संस्थान से यह उम्मीद करना फ़िज़ूल है।

पार्टी सदस्यों तक ऐसी बहुत सी सूचनायें आती है जो जनता या बुद्धिजीवियों तक नहीं पहुँच पाती। पार्टी ‘इनफार्मेशन पूल’ का भी काम करती है। अगर कोई भी व्यक्ति या बुद्धिजीवी पार्टी में आता है तो उसे सूचनाओं के नये स्त्रोत उपलब्ध होते है जो उसकी समझ को व्यापक बनाते है। वह राजनैतिक भाषा सीखता है और उसमे राजनैतिक दृष्टिकोण विकसित होता है। आज के समय में जब राजनैतिक भाषा का स्तर दिन प्रतिदिन गिरता जा रहा है। राजनैतिक चेतना, दृष्टिकोण और भाषा को विकसित करना सख्त आवश्यक हो गया है। पार्टी ‘व्यक्तित्व और नेतृत्व के विकास का प्लेटफॉर्म’ है।

पूरी दुनिया में कम्युनिस्ट आंदोलन का भविष्य राजनैतिक पार्टियों की सक्रियता व सफलता पर निर्भर करता है। अगर ये पार्टियां अपनी छवि को सुधारने और छोटी-छोटी समितियों का निर्माण करके बूथ लेवल पर जनता के बीच पैठ बनाने में सफल होती है तो समाजवादी क्रांति ज्यादा दूर नहीं है। हमारा प्राथमिक उदेश्य पार्टी को पुनर्जीवित करके समाजवादी क्रांति के द्वारा एक बेहतर दुनिया का निर्माण करना है। इस कार्य के लिये पार्टी की सदस्यता और सक्रियता को बढ़ाना होगा। समाजवादी क्रांति का भविष्य हम क्रांतिकारियों की समझ और सक्रियता पर निर्भर करता है। हमे पार्टी की सदस्यता लेकर अधिकाधिक सक्रिय होना पड़ेगा ताकि हम एक बेहतर समाज बना सके।

अभिषेक आज़ाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधछात्र हैं। यह उनके निजी विचार हैं।