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सूचना का अधिकार किसी भी लोकतान्त्रिक व्यवस्था में आम आदमी को प्राप्त सबसे ताकतवर हथियार है| इससे जुड़े सवालों और भ्रम-भ्रांतियों को समझने के लिए निम्नलिखित सामान्य सवालों के जवाब को अवश्य पढ़े :

RTI – सूचना के अधिकार से जुड़े सवाल : पिछले पन्नें – पेज -1, पेज -2, पेज -3, पेज -4,

25. सूचना का अधिकारी अधिनियम कब अस्तित्व में आया है यदि आप कह रहे हैं कि केन्द्र सरकार ने इसे हाल ही में लागू किया है तब आप कैसे कह सकते हैं कि बड़ी संख्या में लोगों ने इससे फायदा उठाया हैं?
सूचना का अधिकारी अधिनियम 12 अक्टूबर 2005 से अस्तित्व में आया इससे पूर्व यह 9 राज्यों में लागू था। ये राज्य हैं- जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडू, आसाम तथा गोवा. इनमें से कई राज्यों में यह पिछले 5 वषों से लागू था और बहुत अच्छा काम कर रहा था।

26. सूचना के अधिकारों के दायरे में कौन कौन से विभाग आते हैं?
केन्द्रीय सूचना का अधिकारों अधिनियम जम्मू-कश्मीर के अलावा पूरे देश में लागू है। ऐसे सभी निकाय जिनका गठन संविधान के तहत, या उसके अधीन किसी नियम के तहत, या सरकार की किसी अधिसूचना के तहत हुआ हो इसके दायरे में आते हैं। साथ ही साथ वे सभी इकाईया जो सरकार के स्वामित्व में हों, सरकार के द्वारा नियन्त्रि त हों अथवा सरकार के द्वारा पूर्ण या आंशिक रूप से वित्तपोषित हों।

27. आंशिक वित्तपोषित से क्या तात्पर्य है?
सूचना के अधिकार कानून या अन्य किसी कानून में “आंशिक रूप से वित्तपोषित” की स्पष्ट व्याख्या नहीं की गई है। सम्भवत: यह इस कानून के इस्तेमाल से समय के साथ-साथ स्वत: इससे सम्बंधित मामलों में न्यायालय के फैसलों से स्पष्ट हो सकेगी।

28. क्या निजी निकाय भी सूचना का अधिनियम अधिनियम के अन्तर्गत आते हैं?
सभी निजी निकाय जो सरकार द्वारा शासित, नियन्त्रित अथवा आंशिक वित्तपोषित होते हैं सीधे सीधे इसके दायरे में आते हैं। अन्य निजी निकाय अप्रत्यक्ष रूप से इसके दायरे में आते हैं। इसका मतलब है कि यदि कोई सरकारी विभाग किसी नियम कानून के तहत यदि निजी निकाय से कोई जानकारी ले सकता है तो उस सरकारी विभाग में निजी निकाय से जानकारी लेने के लिए सूचना के अधिकार के तहत आवेदन किया जा सकता है।

29. क्या सरकारी गोपनीयता कानून, 1923 सूचना के अधिकार के आड़े नहीं आता है?
नहीं, सूचना का अधिकारी अधिनियम 2005 की धारा 22 के अन्तर्गत सूचना का अधिकार अधिनियम , सरकारी गोपनीयता अधिनियम 1923 सहित किसी भी अधिनियम के ऊपर है। सूचना का अधिकार कानून बनने के बाद सिर्फ वही सूचना गोपनीय रखी जा सकती है। जिसकी व्यवस्था इस अधिनियम की धरा 8 में की गई है, इसके अलावा किसी सूचना को किसी कानून के तहत गोपनीय नहीं कहा जा सकता।

30. यदि किसी मामले में सूचना का कुछ हिस्सा गोपनीय हो तो क्या शेष जानकारी प्राप्त की जा सकती है?
हां, सूचना का अधिकारी अधिनियम के धारा 10 के अन्तर्गत, सूचना के उस भाग की प्राप्ति हो सकती है, जिसे धरा 8 के मुताबिक गोपनीय न माना गया हो।

31. क्या फाइल नोटिंग की प्राप्ति निषेध् है?
नहीं, फाइल नोटिंग सरकारी फाइलों का एक अहम भाग है और सूचना के अधिकार में इसे उपलब्ध् कराने की व्यवस्था है। यह केन्द्रीय सूचना आयोग द्वारा 31 जनवरी 2006 के एक आदेश में भी स्पष्ट किया गया है।

32. सूचना प्राप्ति के पश्चात् मुझे क्या करना चाहिए?
इसका कोई एक जवाब नहीं हो सकता। यह इस बात पर निर्भर होगा कि आपने किस प्रकार की सूचना की मांग की है और आपका मकसद क्या है। बहुत से मामलों में केवल सूचना मांगने भर से ही आपका मकसद हल हो जाता है। उदाहरण के लिए अपने आवेदन की स्थिति की जानकारी मांगने भर से ही आपका पासपोर्ट अथवा राशन कार्ड आपको मिल जाता है। बहुत से मामलों में सड़कों की मरम्मत पर पिछले कुछ महीनों में खर्च हुए पैसे का हिसाब मांगते ही सड़क की मरम्मत हो गई। इसलिए सूचना की मांग करना और सरकार से प्रश्न पूछना स्वयं एक महत्वपूर्ण कदम है। अनेक मामलों में यह स्वयं ही पूर्ण है। लेकिन अगर आपने सूचना का अधिकार का उपयोग करके भ्रष्टाचार तथा घपलों को उजागर किया है, तो आप सतर्कता विभाग, सीबीआई में सबूत के साथ शिकायत दर्ज कर सकते हैं अथवा एफ आई आर दर्ज करा सकते हैं। कई बार देखा जाता है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी दोसियो के खिलाफ कार्यवाही नहीं होती। सूचना के अधिकार के अन्तर्गत

आप सतर्कता एजेंसियों पर भी उनके पास दर्ज शिकायतों की स्थितियों की जानकारी मांग कर दबाव डाल सकते हैं। घपलों को मीडिया द्वारा भी उजागर किया जा सकता है, लेकिन दोषियों को सजा मिलने का अनुभव बहुत उत्साह जनक नहीं रहा है। पिफर भी एक बात निश्चित है, इस प्रकार सूचना मांगने और दोषियों को बेनका़ब करने से भविष्य में सुधार होगा। यह अधिकारियो को एक स्पष्ट संकेत है कि क्षेत्रो के लोग सतर्क हो गये हैं और पहले की भांति किया गया कोई भी गलत कार्य अब छुपा नहीं रह सकेगा। इस प्रकार उनके पकड़े जाने का खतरा बढ़ गया है।

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