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सूचना का अधिकार किसी भी लोकतान्त्रिक व्यवस्था में आम आदमी को प्राप्त सबसे ताकतवर हथियार है| इससे जुड़े सवालों और भ्रम-भ्रांतियों को समझने के लिए निम्नलिखित सामान्य सवालों के जवाब को अवश्य पढ़े :

RTI – सूचना के अधिकार से जुड़े सवाल : पिछले पन्नें – पेज -1, पेज -2, पेज -3, पेज -4,

33. क्या सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगने और इस के माध्यम से भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने वालों को परेशान किए जाने की भी संभावना है?
हां, कुछ ऐसे मामले सामने आये हैं, जिसमें सूचना मांगने वालों को शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। ऐसा तब किया जाता है जब सूचना मांगने से बड़े स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार का खुलासा होने वाला हो। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि हर आवेदक को ऐसी धमकी का सामना करना पड़ेगा। सामान्यत: अपनी शिकायत की स्थिति जानने या पिफर किसी दैनिक मामले के बारे में जानने के लिए आवेदन करने पर ऐसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। ऐसा उन मामलों में हो सकता है जिनके सूचना मांगने से नौकरशाही और ठेकेदारों के बीच साठगांठ का पर्दाफाश हो सकता है या पिफर किसी मापिफया के गठजोड़ के बारे में पता चल सकता है।

34. फिर मैं सूचना के अधिकार का प्रयोग क्यों करूं?
पूरी व्यवस्था इतनी सड़ चुकी है कि यदि हम अकेले या साथ मिलकर इसे सुधरने की कोशिश नहीं करेंगें तो यह कभी ठीक नहीं होगी। और अगर हम कोशिश नहीं करेंगे तो और कौन करेगा इसलिए हमें प्रयास तो करना ही होगा। लेकिन हमें एक योजना बना कर इस दिशा में काम करना चाहिए ताकि कम से कम खतरों का सामना करना पड़े। अनुभव के साथ कुछ सुरक्षा और योजनाएं भी उपलब्ध हैं।

35. ये योजनाएं क्या है?
आप आगे आकर किसी भी मुद्दे पर सूचना के अधिकार के तहत सूचना मांगते हैं तो आवेदन करते ही आप पर कोई हमला नहीं करेगा। पहले तो वो आपको बहलाने या जीतने का प्रयास करेंगे। इसलिए जैसे ही आप कोई असुविधाजनक आवेदन डालेंगे कोई आपके पास आकर बड़ी विनम्रता से आवेदन वापस लेने के लिए कहेगा। आप उस आदमी की बातों से यह समझ सकते हैं कि वह कितना गम्भीर है और वो क्या कर सकता है। अगर आपको मामला गम्भीर लगता है तो अपने 10-15 परिचितों को उसी सार्वजनिक विभाग में वही सूचना मांगने के लिए तुरन्त आवेदन करने के लिए कहें। ये और भी अच्छा होगा, अगर आपके मित्रा देश के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं। अब किसी को पूरे देश में फैले आपके 10-15 परिचितों को एक साथ नुकसान पहुंचाना बहुत मुश्किल होगा। देश के दूसरे हिस्सों में रहने वाले आपके दोस्त डाक के माध्यम से भी आवेदन डाल सकते हैं। इसको ज्यादा से ज्यादा प्रचार देने का प्रयास करें। इससे आपको सही सूचना भी मिल जायेगी और आपको कम से कम खतरों का सामना करना पड़ेगा।

36. क्या सूचना पाकर लोग सरकारी कर्मचारियों को ब्लैक मेल भी कर सकते है?
इसका जवाब जानने से पहले हम खुद से एक सवाल पूछें- सूचना का अधिकार क्या करता है? यह केवल सच्चाई को जनता के सामने लाता है। यह खुद कोई सूचना नहीं बनाता। यह केवल पर्दा हटाता है और सच्चाई को जनता के समक्ष लाता हू । क्या यह गलत है इसका दुरूपयोग कब हो सकता है। तभी जब किसी अधिकारी ने कुछ गलत किया है और उसकी सूचना जनता के सामने आने में पकड़े जाने का खतरा हो. सरकार के भीतर चल रही गड़बड़ी अगर जनता के सामने आती है तो इसमें गलत ही क्या है। इसका सामने आना जरूरी है या इसको छुपाया जाना। हां, जब ऐसी कोई सूचना किसी के द्वारा प्राप्त की जाती है तो वह उस अधिकारी को ब्लैकमेल कर सकता है। पर हम गलत अधिकारियो की रक्षा क्यों करें।

यदि किसी अधिकारी को ब्लैकमेल किया जा रहा है तो वह भारतीय, दण्ड संहिता के तहत ब्लैकमेल के खिलाफ एफ.आई.आर. कराने के लिए स्वतन्त्रा है। अधिकारी को ऐसा करने दीजिए। फिर भी हम आवेदन द्वारा मांगी गई सारी सूचना को वेबसाइट पर डालकर किसी के द्वारा किसी को करने ब्लैकमेल की संभावना को दूर कर सकते हैं। आवेदक उस स्थिति में अधिकारी को ब्लैकमेल कर सकता है जब सिर्फ आवेदक को ही सूचना मिली हो और वह उसे आम करने की धमकी दे रहा हों। पर जब सभी जानकारियां वेबसाइट पर डाल दी जाएंगी तो ब्लैकमेल करने की संभावना अपने आप खत्म हो जाएगी।

पढ़ते रहिये … RTI – सूचना के अधिकार से जुड़े सवाल – पेज -1, पेज -2, पेज -3, पेज -4, पेज -5, पेज -7