(दलित समुदाय से संन्यास लेकर संत बने कन्हैया प्रभु नंद गिरी)
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से दलितों को खुश करने के का नया हथकंडा कहें या धार्मिक एजेंडे का बदला स्वरूप, लेकिन ख़बर पक्की है कि  पहली बार किसी दलित को महामंडलेश्वर की उपाधि दी जा रही है। हाल ही में हैदराबाद में एक मंदिर के पुजारी ने  एक दलित युवक को अपने कंधों पर बिठाया, और श्री रंगनाथ मंदिर के भीतर लेकर गए। कहा गया कि ऐसा करने से हालिया दिनों में दलितों के साथ हुए भेदभाव और उनके खिलाफ हुईं हिंसात्मक घटनाओं के विरुद्ध देशभर में मजबूत संदेश जाएगा। यह भी कहा गया कि दलित को कंधे पर बैठाकर मंदिर में प्रवेश करवाना एक पुरानी परम्परा है। ब्राह्मणों में उमड़े दलित प्रेम की नई बानगी के रूप में अब ये ख़बर आ रही है कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने दलित को महामंडलेश्वर बनाने का फैसला लिया है।

दरअसल खबर है कि तीर्थ नगरी प्रयाग में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने दलित समुदाय से संन्यास लेकर संत बने कन्हैया प्रभु नंद गिरी को महामंडलेश्वर बनाने का फैसला लिया है। उन्हें कुंभ के दौरान महामंडलेश्वर बनाया जाएगा। सोमवार को कन्हैया प्रभु को परंपरा के अनुसार जूना अखाड़े में शामिल किया गया।

अखाड़ा परिषद के अनुसार, उनके इतिहास में यह पहला मौका होगा जब किसी दलित समुदाय से आने वाले संत को महामंडलेश्वर की पदवी दी जाएगी। इससे पहले आदिवासी समुदाय के कुछ संतों को महामंडलेश्वर बनाया जा चुका है।

आजमगढ़ जिले की बरौली दिवाकर पट्टी (लक्ष्मणपुर) गांव के रहने वाले कन्हैया कुमार कश्यप ने ज्योतिष शास्त्र में शिक्षा हासिल करने के बाद काफी पहले संसारिक दुनिया को अलविदा कह दिया था।

उज्जैन कुंभ के दौरान 22 अप्रैल 2016 को उन्हें विधिवत गोसाई साधु की दीक्षा जगद्गुरु पंचानंद गिरी जी महाराज ने दी थी। गोसाई साधु की दीक्षा के बाद उन्हें नया नाम कन्हैया प्रभु नंद गिरि मिला।

फिलहाल कन्हैया प्रभु नंद गिरि पंजाब में रहते हैं और उनके शिष्यों की संख्या भी काफी अधिक है। सोमवार को वह जब इलाहाबाद पहुंचे तो उन्हें विधिवत जूना अखाड़ा में शामिल कर लिया गया। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने बताया कि कन्हैया प्रभु एक बड़े संत हैं और इसे देखते हुए ही उन्हें जूना अखाड़े में शामिल किया गया है। 2019 में प्रयाग में लगने वाले कुंभ में उन्हें महामंडलेश्वर बनाए जाने का भी निर्णय लिया गया है । कुंभ में ही उनका पट्टाभिषेक कर महामंडलेश्वर बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी।

कहा यह जाता है कि संत की कोई जाति नहीं होती लेकिन कन्हैया प्रभु को विशेष रूप से महामंडलेश्वर बनाने के लिए दलित समाज से आने की वजह से चुना जाना यह साबित करता है कि चाहे कोई संत बन जाए या धर्म बदल ले, जाति उसका पीछा नही छोडती है। देश में यह पहला मौका होगा जब दलित समुदाय से संत बने किसी महात्मा को महामंडलेश्वर की उपाधि दी जाएगी, इससे पहले आदिवासी समुदाय के कुछ संतों को महामंडलेश्वर बनाया गया है। महंत नरेंद्र गिरी ने बताया कि इस फैसले से देश भर में सामाजिक समरसता की दिशा में सुखद संदेश जाएगा।

 

विवादित रही है महामंडलेश्वर की उपाधि :

इससे पहले भी यह देखने को मिला है कि कुछ व्यक्तियों को महामंडलेश्वर की उपाधि दिए जाने पर भारी बवाल हुआ है। 2015 में इलाहाबाद में बियर बार और डिस्को थिक के मालिक बिल्डर सचिन दत्ता को महामंडलेश्वर की पदवी दी गई थी।

यह सवाल पूछे जाने लगे थे कि आखिर एक करोडपति सचिन दत्ता उर्फ सच्चिदानंद गिरि को किन नियमों के तहत अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाया गया है? यह भी कयास लगाये जाने लगे थे कि सचिन पर करोड़ों रुपये का कर्ज है और इन्हीं से बचने के लिए सचिन धर्म का गलत इस्तेमाल कर रहा है। बहरहाल, एक करोडपति कारोबारी का बियर बार से महामंडलेश्वर तक का सफ़र विवादों से भरपूर घिरा रहा था।

इसी तरह आप भूल नहीं पाए होंगें कि रातों रात प्रसिद्धी और ऎश्वर्य पाने वाली राधे मां को जूना अखाड़े द्वारा महामंडलेश्वर की उपाधि देना किस तरह विवादों में घिरा रहा था। महामंडलेश्वर बनते ही मीडिया ने उनके छोटे कपडे में अनेक तस्वीरों और वीडियो का प्रसारण करना शुरू कर दिया था, जिसमें सोफे पर लेटी हुई उनकी एक तस्वीर जिसे लगभग आधा सेंसर या ब्लर करके दिखाया जाता था, खासी सुर्खियाँ बंटोर रही थी। बाद में उन पर लगे आरोप सही पाए जाने पर अखाड़े ने उनसे महामंडलेश्वर की उपाधि वापिस भी ले ली थी।

विवादित संतों को पदवी दिए जाने का सिलसिला यहीं नहीं थम गया। जूना अखाड़े की तरफ से राधे मां को महामंडलेश्वर बनाए जाने को लेकर विवाद चल ही रहा था कि पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी की ओर से विवादित संत नित्यानंद स्वामी को महामंडलेश्वर बना दिया गया। नित्यानंद स्वामी सेक्स स्कैंडल में पकड़े जा चुके थे। जिस समय नित्यानंद ध्यानपीठम के पीठाधीश्वर नित्यानंद स्वामी को महामंडलेश्वर बनाया गया, उस समय उन पर गंभीर चारित्रिक आरोप लगे हुए थे। उनका मामला अदालत में विचाराधीन था।