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भाजपा धर्म की राजनीति करती है, इस बात को किसी प्रमाण की जरूरत नहीं है। भाजपा विकास के नाम पर धर्म, मंदिर, और जाति के आधार पर वोट हासिल करती रही है जबकि आम आदमी को धर्म जाति से कोई मतलब नहीं है बल्कि उसे तो समाज में फैली विसंगति से छुटकारा पाना है लेकिन राजनीतिक दल इस बात को समझने को राजी नहीं हैं।

बहरहाल यह हाल सिर्फ भाजपा का नहीं है बल्कि हर पार्टी का है।

इस आशय की बात इसलिये भी कही जा रही है क्योंकि समाजवादी पार्टी ने केन्द्र और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इशारे पर अल्पसंख्यकों, दलितों और पिछड़ों को समाप्त करने का कुचक्र रचने का आरोप लगाते हुए इसके खिलाफ राष्ट्रव्यापी संघर्ष का ऐलान किया है।

सपा के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने आरोप लगाया कि देश और उत्तर प्रदेश में जब से भाजपा की सरकार बनी है तभी से संघ के इशारे पर पिछड़ा वर्ग, दलितों तथा अल्पसंख्यकों का दमन किया जा रहा है।

उन्होंने महाराष्ट्र में पिछले दिनों दो पक्षों की हिंसक झड़प का जिक्र करते हुए कहा कि महाराष्ट्र की घटना से भाजपा का दलित विरोधी चेहरा उजागर हो गया है।

भाजपा एक रणनीति के तहत दलितों, पिछड़े वर्ग के लोगों तथा अल्पसंख्यकों को नेस्तनाबूद करने पर आमादा है।

चौधरी ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार तीन तलाक के खिलाफ प्रस्तावित कानून के जरिए मुसलमानों का दमन करना चाहती है।

सपा वैसे भी इस बात पर दूध की धुली नहीं है फिर भी उसके नेता ने एक ऐसा मसला चर्चा में उठा दिया है जिस पर विमर्श होने की आवश्यकता है।