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एक नया शोध कहता है कि देश भर में बढ़ राह प्रदूषण ही किशोर में एंगर यानी बढ़ते गुस्से का कारण है। आज जिस तरह से युवा हिंसा और गुस्से की छपते में आकर अपराध को बढ़ावा दे रहे हैं उस से तो यही लगता है कि इस शोध में काफी तर्कसंगत बात कही गयी है, हालांकि यह शोध भारत के बजाये अमेरिका में किया गया है लकिन लागू हमारे देश में भी बखूबी होता है। क्योंकि यहाँ तो वहां से भे एज्यादा प्रदूषण की मार है।

एक नये अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि वायु प्रदूषण का उच्च स्तर किशोरों के बीच आपराधिक व्यवहार के खतरे को बढ़ा सकता है। अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि वायु प्रदूषण के उच्चतम स्तर की वजह से छोटे और विषैले कण, विकसित हो रहे मस्तिष्क में प्रवेश कर जाते हैं जिससे मस्तिष्क में सूजन होती है।

इससे भावना और फैसले लेने के लिए जिम्मेदार मस्तिष्क के हिस्से को नुकसान पहुंचता है। यह अध्ययन जर्नल ऑफ अब्नॉर्मल चाइल्ड साइकॉलजी में प्रकाशित हुआ है। यह रिसर्च स्वच्छ हवा के महत्व को बताने वाली एक चेतावनी है जो यह दिखाती है कि शहरी क्षेत्रों में पौधों की कितनी जरूरत है।

इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाली अनुसंधानकर्ता डायना योनान के अनुसार प्रदूषण के लिए जिम्मेदार छोटे कणों को पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5) भी कहा जाता है। यह कण एक बाल के किनारे से भी 30 गुणा छोटा होता है। ये कण स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया की रिसर्च असोसिएट योनान ने कहा, ‘ये छोटे विषैले कण हमारे शरीर में प्रवेश कर हमारे फेफड़ों और दिल को प्रभावित करने के साथ ही पीएम 2.5 खासकर विकसित हो रहे मस्तिष्क के लिए नुकसानदायक है।
यह मस्तिष्क की संरचना और तंत्रिका तंत्र को क्षति पहुंचाने के साथ ही जैसा कि हमारे अध्ययन में बताया गया है किशोरों के व्यवहार भी प्रभावित करते हैं।’

समय आ गया है कि हम जल्द से जल्द प्रदूषण के इस जहर से छुटकारा पा लें वर्ना किशोरों को इस मुश्किल से कौन बाहर निकालेगा?