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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट SC/ST एक्ट में गिरफ्तारी से पहले जांच अनिवार्य करने के अपने फैसले पर कायम है। माननीय उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में केंद्र की पुनर्विचार याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई करते हुए सभी पक्षों को अपना पक्ष लिखित रूप में देने के लिए कहा है| इस मामले में अगली सुनवाई 11 अप्रैल को होगी। तब तक सुप्रीम कोर्ट का पिछला आदेश जारी रहेगा।  सुनवाई के दौरान एजी की दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम एक्ट के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बेगुनाह को सजा न मिले, यह देखा जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी –
कोर्ट ने जो सुरक्षा उपाय किये है ताकि किसी निर्दोष को सजा न मिले।
ये अकेला ऐसा कानून है कि जिसमें किसी व्यक्ति को कोई कानूनी उपचार नहीं मिलता।
अगर एक बार मामला दर्ज हुआ तो व्यक्ति गिरफ़्तार हो जाता है।
इस मामले में अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं है।
जबकि दूसरे मामलों में संरक्षण के लिए फ़ोरम है, कोर्ट हैं जो झूठे मामलों में सरंक्षण दे सकता है।
कोर्ट ने कहा कि अगर कोई दोषी है तो उसे सजा मिलनी चाहिए लेकिन बेगुनाह को सजा न मिले।
कोर्ट ने कहा कि प्रेरित, दुर्भावना और झूठे आरोप लगाकर उनकी स्वतंत्रता का हनन नहीं कर सकते।