Wednesday, February 20, 2019
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आकाश से गोलियों की बौछार (कविता)- बोरीस स्‍कीस्‍लूत्‍

आकाश से गोलियों की बौछार की तरह तालुओं को जला रही है वोदका आँखों से टपकते हैं तारे जैसे गिर रहे हों बादलों के बीच से और...

हमारी अर्थी शाही हो नहीं सकती (कविता)- अनुज लुगुन

हमारे सपनों में रहा है एक जोड़ी बैल से हल जोतते हुए खेतों के सम्मान को बनाए रखना हमारे सपनों में रहा है कोइल नदी के किनारे एक...

हैरान थी हिन्दी (कविता)- दिविक रमेश

हैरान थी हिन्दी उतनी ही सकुचाई लजाई सहमी सहमी सी खड़ी थी साहब के कमरे के बाहर इज़ाजत मांगती मांगती दुआ पी.ए. साहब की तनिक निगाह की। हैरान थी हिन्दी आज भी आना पड़ा था...

मार्खेज को डिमेंशिया हो गया है (कविता)- अंशु मालवीय

मार्खेज को डिमेंशिया हो गया है। जीवन की उत्ताल तरंगों के बीच गिर-गिर पड़ते हैं स्मृति की नौका से बिछल-बिछलकर; फिर भरसक-भरजाँगर कोशिश कर बमुश्किल तमाम चढ़ पाते हैं...

सत्य कोयले की खदान में लगी आग है (कविता)- बाबुषा कोहली

मैं कहती हूँ किसी इश्तहार का क्या अर्थ बाकी है कि जब हर कोई चेसबोर्ड पर ही रेंग रहा है आड़ी-टेढ़ी या ढाई घर चालें तो...

वृद्धाएँ धरती की नमक हैं (कविता)- अनामिका)

'कपड़ा है देह', '...जीर्णाणि वस्त्राणि' ...वाला यह श्लोक 'गीता' का, सुना था कभी बहुत बचपन में पापा के पेट पर पट्ट लेटे-लेटे ! संदर्भ यह है कि दादाजी गुजर...

अश्लीलता, आत्मा की (कविता)- आंद्रेइ वोज्नेसेन्स्की 

अपने नग्न प्रशंसक के साथ नाच रही है सबके सामने प्रेमिका। खुश हो ले, ओ शरीर की अश्लीलता कि आत्मा भी प्रदर्शित करती है अपनी अश्लीलता! कला जगत...

विलुप्त हो रहे प्राणी (कविता)- आंद्रेइ वोज्नेसेन्स्की

विलुप्त हो रहे सभी प्राणियों का विवरण लिख दिया गया है मेरी श्वेत पुस्तिका में। चिंताजनक हैं ये कुछ लक्षण कि पहले तो वर्ष भर के लिए फिर...

घास की पुस्तक (कविता)- अर्सेनी तर्कोव्‍स्‍की

अरे नहीं, मैं नगर नहीं हूँ नदी किनारे कोई क्रेमलिन लिये मैं तो नगर का राजचिह्न हूँ।   राजचिह्न भी नहीं मैं उसके ऊपर अंकित तारा मात्र हूँ, रात...

शासको, तुम हार रहे हो (कविता)-अर्पण कुमार

आखिर कब तक तुम हमें ठगते और कोई कब तक चुप और निष्क्रिय रह सकता है किसी के खौफनाक चेहरे से डरकर या फिर किसी के देवत्व की...