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voters2-kr6D-621x414@LiveMint8 मार्च को होने वाले उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के सातवें और आखिरी चरण के लिए मतदान होगा। आखिरी चरण में यूपी के पूर्वांचल की 40 सीटों के लिए मतदान होगा। मुख्य मुकाबला बहुजन समाज पार्टी , भारतीय जनता पार्टी  और समाजवादी पार्टी एवं कांग्रेस गठबंधन के बीच माना जा रहा है। छह मार्चको इन सीटों के लिए चुनाव प्रचार की आखिरी तारीख है।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने यूपी के सातवें चरण एवं आखिरी चरण में चुनावी अखाड़े में उतरे 535 में से 528 प्रत्याशियों के चुनाव आयोग को दिए हलफनामों का विश्लेषण किया है। चुनाव में छह राष्ट्रीय दलों, चार प्रांतीय पार्टियों, 77 गैर-मान्यताप्राप्त दलों और 136 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।

सातवें चरण में चुनाव लड़ रहे जिन 528 प्रत्याशियों के दिए ब्योरे का एडीआर ने विश्लेषण किया उनमें से 115 (करीब 22 प्रतिशत) ने बताया है कि उन पर आपराधिक मामले चल रहे हैं। इनमें से 95 उम्मीदवारों (करीब 18 प्रतिशत) पर गंभीर आपराधिक मामले (हत्या, हत्या की कोशिश, अपहरण, महिलाओं के किलाफ अपराध) चल रहे हैं।

सातवें चरण में समाजवादी पार्टी के 31 में 19 (61 प्रतिशत) पर आपराधिक मामले चल रहे हैं। कांग्रेस के नौ उम्मीदवारों में से पांच (करीब 56 प्रतिशत पर आपराधिक मामले चल रहे हैं। बसपा के 40 उम्मीदवारों में से 17 (43 प्रतिशत) पर आपराधिक मामले चल रहे हैं।  वहीं 136 निर्दलीय उम्मीदवारों में से 18 (करीब 13 प्रतिशत) पर आपराधिक मामले चल रहे हैं। भाजपा ने कुल 31 में से 13 (करीब 42 प्रतिशत पर आपराधिक मामले हैं।

अगर बात गंभीर आपराधिक मामलों की करें तो यूपी विधान सभा चुनाव के सातवें चरण में सपा के 48 प्रतिशत उम्मीदवारों (31 में से 15 पर), कांग्रेस के 56 प्रतिशत (नौ में से पांच पर), बसपा के 38 प्रतिशत (40 में 15 पर), भाजपा के 29 प्रतिशत (31 में से नौ पर) पर गंभीर आपराधिक मामले हैं। 136 निर्दलीय में से 18 (13 प्रतिशथ) पर गंभीर आपराधिक मामले हैं।

कुल 40 में से 23 (57.5 प्रतिशत) विधान सभाओं पर तीन या उससे ज्यादा ज्यादा दागी उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। राष्ट्रीय लोक दल के 31 में से 4 (करीब 19 प्रतिशत) प्रत्याशियों पर आपराधिक मामले चल रहे हैं। तीन या ज्यादा दागी उम्मीदवारों वाली विधान सभाओं को रेड अलर्ट विधान सभाएं कहते हैं।