Print Friendly, PDF & Email

rahul-and-akhilesh_650x400_714857456039 मार्च को आए एक्जिट पोल के नतीजों के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने चुप्पी तोड़ी। राहुल गांधी ने स्पष्ट ‌कहा कि “वह एक्जिट पोल पर किसी भी तरह की कोई राय नहीं देंगे।” हालांकि उन्होंने एक्जिट पोल के परिणाम बीजेपी के पक्ष में आए नतीजों पर कहा कि “बिहार जैसा ही हाल होगा।”  मालूम हो कि एक्जिट पोल कांग्रेस के पक्ष में नहीं रहे हैं।  एक्जिट पोल के परिणाम बीजेपी के पक्ष में गए। पंजाब को छोड़कर बाकी सभी राज्यों में बीजेपी को बहुमत मिलता दिखाया जा रहा है।कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि “हमारा गठबंधन यूपी में जीत रहा है| हमने ऐसे ही एक्जिट पोल बिहार में भी देखे थे, इस बारे में अब कल बात करेंगे|”

रामगोपाल बोले- ‘दबाव में बदले गए मूल एक्जिट पोल, हमारी बन रही सरकार’​
न्यूज चैनलों के एक्जिट पोल में उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के आंकड़े दिखाये जाने पर सपा नेता रामगोपाल यादव ने बड़ा बयान दिया है। रामगोपाल ने कहा कि मेरे पास जानकारी है कुछ दिनों पहले चैनलों के दबाव में मूल एक्जिट पोल को बदल दिया गया था। हम सौ प्रतिशत चुनाव जीतने वाले हैं।

रामगोपाल का यह भी कहना है कि “सपा-कांग्रेस गठबंधन की सरकार यूपी में बनने जा रही है।” इससे पहले 9मार्च को सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव गठबंधन के पक्ष में खुलकर सामने थे और सरकार बनने दावा भी किया था। मुलायम सिंह यादव ने गुरुवार को कहा कि “नतीजे हैरान करने वाले होंगे।”

सट्टा बाजार में भी बीजेपी की जीत
अमर उजाला की खबर के अनुसार, मुंबई और राजस्थान के चुरू स्थित सट्टा बाजार में सबसे ज्यादा दांव भाजपा पर लगाया जा रहा है। हालांकि यूपी में पहले चरण के चुनाव तक सपा-कांग्रेस गठबंधन आगे थी लेकिन उसके बाद भाजपा ने सभी पार्टियों को पीछे छोड़ दिया। चुरू के अंडरग्राउंड सट्टा बाजार के मुताबिक यूपी चुनाव में भाजपा को 190-193 सीटें मिल सकती हैं, जबकि सपा-कांग्रेस गठबंधन को 125-128 सीटे मिलने की संभावना बताई जा रही है। बसपा 65 से 67 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रहेगी।

वहीं विधानसभा चुनावों के एक्जि‌ट पोल में बीजेपी को बढ़त मिलने के बाद यूपी में सपा के बसपा से हाथ मिलाने की संभावना पर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। खबरों के मुताबिक मायावती और अखिलेश यादव को एक साथ लाने के लिए पर्दे के पीछे से कांग्रेस और जेडीयू कई महीनों से कोशिश कर रही है।


हिंदी अखबार नवभारत टाइम्स अखबार में प्रकाशित खबर के मुताबिक बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के एक करीबी वरिष्ठ नेता बीते दो महीनों से मायावती और अखिलेश को साथ लाने के लिए कोशिशें कर रहें हैं। नीतिश कुमार और कांग्रेसी नेता इसके लिए दो महीनों में दो बार बात भी कर चुके हैं। दूसरी ओर यूपी के एक्जि‌ट पोल में भाजपा को बढ़त मिलती देख अखिलेश यादव और मायावती के सुर बदलने लगे हैं। जहां अखिलेश यादव ने इशारों में मायावती से हाथ तक मिलाने की बात कर डाली, वहीं मायावती ने भी सीधे तौर पर इनकार न करते हुए 11 मार्च के बाद उस पर जवाब देने की बात कही।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि “सपा और बसपा के बीच पूर्व में कड़वाहट को देखते हुए इनके बीच किसी तरह के गठबंधन को असंभव माना जाता रहा है, लेकिन सपा का नेतृत्व मुलायम के हाथों से निकल अखिलेश के हाथों में आने से इसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।”