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भाजपा नीत एनडीए से राजनेताओं और नौकरशाही और पेशेवरों के दूर होने का सिलसिला आगामी की चुनावों की आहट के करीब आते आते तेज होता जा रहा है। हाल ही में जहां एनडीए के पूर्व आर्थिक सलाहाकार रहे अरविंद सुब्रह्मन्यणम ने सरकार की नोटबंदी और जीएसटी की आलोचना की थी तो वहीं अब अचानक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने निजी कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वैसे तो अपने इस्तीफे की वजह उर्जित पटेल ने निजी कारणों को बताया है लेकिन जानकारों का मानना है कि इस अचानक दिए इस्तीफे के पीछे सरकार और रिजर्व बैंक के रिश्तों में लम्बे समय से चल रही तनातनी ही एक कारण है।

पटेल ने इस्तीफें में कहा कि निजी कारणों की वजह से मैंने तत्काल प्रभाव अपना पद छोड़ने का फैसला किया है। यह मेरे लिए बेहद सम्मान और गर्व की बात है कि मैंने आरबीआई के गवर्नर पद पर इतने साल काम किया। हो सकता है कि थोडे समय बाद उर्जित पटेल भी मोदी सरकार की नीतियों पर उनके पूर्व आर्थिक सलाहकार की तरह ही हमला बोल दें परंतु अभी तक तो उन्होंने इसे निजी कारणों से दिया गया इस्तीफा ही बताया है।

बहरहाल, मामला कुछ भी हो यह साफ जाहिर हो गया है कि मोदी सरकार के कार्यकाल के आखिरी दिन ना तो स्वयं मोदी और ना ही भाजपा और एनडीए के लिए सुखद रहने वाले हैं।

मोदी सरकार उप चुनावों और चुनावों में हार के साथ ही अपने किये गये वादों और आर्थिक विकास के मोर्चे पर भी बुरी तरह से विफल रही और इस इस्तीफे ने मोदी सरकार का संकट और अधिक बढ़ा दिया है। जहां आर्थिक मामलों के जानकार आने वाले दिनों में मंदी की आशंका व्यक्त कर हे हैं तो उर्जित पटेल ने भारतीय अर्थव्यवस्था के भीतर संकटों पर बहस की एक नई शुरूआत को हवा दे दी है। बेशक उर्जित पटेल ने इस्तीफे के कारण निजी बताया हो परंतु पूरा देश उनके इस्तीफे की वजह वही मानेगा जिसके लिए उन्होंने पिछले दिनों इस्तीफे की धमकी दी थी। सके पहले 19 नवंबर को होने वाली आरबीआई बोर्ड की बैठक में भी उर्जित पटेल के इस्तीफा देने की आशंका थी। लेकिन तब बताया गया था कि केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बाद यह मसला हल हो गया है।

केंद्र सरकार और आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल के बीच पिछले कुछ महीनों से लगातार तनाव स्थिति बनी हुई थी। दोनों के बीच नीतिगत मुद्दों को लेकर मतभेद की खबर है। 2018 के शुरुआती महीनों में सरकार और आरबीआई के बीच ज्यादा अच्छे संबंध नहीं रहे हैं और दोनों ही ओर से बात भी ज्यादा नहीं की जा रही थी। मिली जानकारी के मुताबिक इस समय जो हालात बन रहे हैं उनका असर उर्जित पटेल के भविष्य पर भी पड़ सकता है। अगले साल सितंबर में उर्जित के तीन साल पूरे हो रहे हैं, ऐसे में उनके सेवा विस्तार और बाकी कार्यकाल पर खतरा मंडरा रहा था।

रिपोर्ट के मुताबिक ब्याज दरों में कटौती न होने पर सरकार नाराज है। नीरव मोदी के धोखाधड़ी मामले पर भी बैंक और सरकार के बीच स्थिति तनावपूर्ण है। वहीं 2018 की शुरुआत से ही करीब आधे दर्जन मुद्दों पर बैंक और सरकार के बीच मतभेद हैं। पटेल चाहते हैं कि सरकारी बैंकों पर नजर रखने के लिए आरबीआई को और शक्तिशाली बनाना चाहिए।