स्पर्म की उम्र से जुड़े मिथक और सच

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आज भी लोगों में यह भ्रांति फैली है कि स्पर्म बाहर निकलते ही नष्ट हो जाते हैं। कुछ यह मानते हैं कि ज्यादा सेक्स करने से स्पर्म खत्म हो जाते हैं।

तमाम भ्रांतियां बताती हैं कि स्पर्म को लेकर अभी लोग जागरूक नहीं हैं। दरअसल स्पर्म प्रजनन के लिए बेहद आवश्यक कंपोनेंट होते हैं। लोगों में इन्हें लेकर कई तरह की भ्रामक धारणाएं भी होती हैं।

हमारे समाज में आज भी सेक्शुअल हेल्थ से जुड़े विषयों पर चर्चाएं खुलकर नहीं होतीं। ऐसे में इनसे जुड़े भ्रम लोगों के मन में चिंता और भय बनकर समाए रहते हैं।

सच तो यह है कि स्खलन के बाद स्पर्म के निर्माण में तकरीबन 10 हफ्तों का वक्त लगता है। पुरुषों में स्पर्म का बनना कभी बंद नहीं होता है।

महिलाओं में एक उम्र के बाद अंडोत्सर्ग की प्रक्रिया बंद हो जाती है लेकिन पुरुषों में स्पर्म निर्माण की प्रक्रिया जीवनभर चलती रहती है।

उम्र बढ़ने के साथ साथ पुरुषों में स्पर्म काउंट कम होने लगते है। एक अध्ययन में कहा गया है कि पुरुषों को अपने स्पर्म की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जरूरी है कि वह महीने में कम से कम चार बार स्खलित हों।

स्पर्म एक अनमोल चीज है लेकिन इसे संग्रह करने का कोई फायदा नहीं। इनका निर्माण और खात्मा एक सतत प्रक्रिया है।





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