गेमिंग को लेकर संजीदा है विश्व स्वास्थ्य संगठन

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देश में अभिभावक इस बात से बेहद परेशान है कि उनके बच्चे गेम ओबसेशन के शिकार है और यह एक डिसऑर्डर का रूप ले चुका है। अब तक तो यह बात हम हे एकाहते थे लेकिन अब इस बार को कन्फर्म कर दिया है विश्व स्वस्थ्य संगठन ने। इस संगठन के मुताबिक़ अगर आपके बच्चे विडियो गेम्स के आदि हो रहे हैं तो सर्तक हो जाइए। जल्दी ही उनके इस व्यवहार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) मानसिक स्वास्थ्य स्थिति की श्रेणी में रख सकता है।

आई न्यू साइंटिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पहली बार WHO गेमिंग डिसऑर्डर को रोगों के अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण (ICD) में शामिल करने के बारे में सोच रहा है।

ICD एक नैदानिक नियमावली है जिसे WHO द्वारा प्रकाशित किया जाता है, जिसे पिछली बार 27 साल पहले 1990 में अपडेट किया गया था। नियमावली का 11वां संस्करण 2018 में प्रकाशित होना है और इसमें गेमिंग डिसऑर्डर को एक ऐसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के तौर पर रखा जाएगा जिसकी निगरानी किए जाने की जरूरत है।

WHO द्वारा जारी 11वें संस्करण के मसौदे में गेमिंग डिसऑर्डर को स्थायी या आवर्ती खेल व्यवहार (डिजिटल गेमिंग या विडियो गेम) के तौर पर बताया गया है, जो ऑनलाइन या ऑफलाइन हो सकता है। इस मसौदे में कई तरह के व्यवहारों को सूचीबद्ध किया गया है, जिससे चिकित्सक यह तय कर सकते हैं कि किसी व्यक्ति का व्यवहार गंभीर स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में पहुंच गया है या नहीं।

अगर आप बहुत ज्यादा एक्शन वीडियो गेम खेलते हैं तो सावधान हो जाएं, इससे आपके मस्तिष्क के ग्रे मैटर में कमी आ सकती है। इस कमी से तनाव, स्किजोफ्रेनिया (एक प्रकार का पागलपन) और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

एक नए अध्ययन में इससे संबंधित चेतावनी दी गई है। कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ मॉन्ट्रियल के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया है कि एक्शन गेम खेलने के आदी लोगों के हिप्पोकैम्पस में ग्रे मैटर कम होता है। हिप्पोकैम्पस, मस्तिष्क का ऐसा बड़ा हिस्सा होता है जो अतीत के अनुभवों को याद रखने के लिए जिम्मेदार होता है।

पहले के कई अध्ययनों ने यह दिखाया था कि हिप्पोकैम्पस में कमी से व्यक्ति में मस्तिष्क संबंधी बीमारी के पैदा होने का खतरा रहता है। इससे पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीसीडी), अल्जाइमर, स्किजोफ्रेनिया और तनाव जैसी बीमारियां हो सकती है।

अनुसंधानकर्ताओं ने करीब 100 (51 पुरुष और 46 महिलाएं) लोगों को लेकर उन्हें कई तरह के एक्शन गेम 90 घंटे तक खेलने को दिए। अनुसंधानकर्ताओं की टीम ने गेम खेलने के आदी लोगों का मस्तिष्क स्कैन करके उसकी तुलना नहीं खेलने वालों लोगों से की। उन्होंने पाया कि गेम के आदी लोगों के मस्तिष्क में ग्रे मेटर की कमी थी।





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