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सर्दियां जब भी आती हैं, अपने साथ छोटे बच्चों और बूढ़ों के लिए कई समस्याएं लेकर आती है। य़ह एक ऐसा समय होता है, जब व्यक्ति को खुद का स्वास्थ्य संबंधी ध्यान रखना बेहद ज़रूरी हो जाता है। बाहर चल रही ठंडा हवा बूढ़ों के लिए जोड़ों का दर्द, तो बच्चों के लिए ज़ुखाम और बुखार का कारण बन जाती है। ऐसे में लोग सर्दियों का मज़ा न लेते हुए खुद को बीमारियों से घेर लेते हैं।

सर्दियों का मौसम एक ऐसा मौसम होता है, जो अपने साथ स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव भी लेकर आती है। ऐसे में खुद को बीमारियों से आप कैसे बचा सकते हैं यह अच्छी तरह जान लेने बेहद आवश्यक होता है। चिकित्सक की सलाह के अनुसार सर्दियों में व्यक्ति को खूब धूप सेकनी चाहिए, क्योंकि ऐसा न करना विटामिन-डी की कमी, अवसाद, जोड़ों का दर्द, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी का कारण बन सकता है। दिन की शुरुआत नाश्ते से पहले आधा लीटर पानी पीकर करें और हर घंटे बाद उचित मात्रा में पानी पीते रहें।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के मनोनीत अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल का कहना है कि “यह माना हुआ तथ्य है कि सर्दियों में दिल और दिमाग के दौरे या कार्डियक अरेस्ट की वजह से मौतों के मामले बढ़ने लगते हैं। इसके कई कारण हैं। पहला तो दिन छोटे हो जाते हैं| जिससे हार्मोन में असंतुलन पैदा होता है और शरीर में विटामिन-डी की कमी आती है। इससे दिल और दिमाग के दौरे की आशंका रहती है। दूसरा, ठंड के मौसम में दिल की धमनियां सिकुड़ जाती हैं| जिससे दिल को रक्त और ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। ठंडे मौसम में खास कर उम्रदराज लोगों को अवसाद घेर लेता है| जिससे उनमें तनाव और हाईपरटेंशन काफी बढ़ जाता है। सर्दियों के अवसाद से पीड़ित लोग अक्सर ज़्यादा चीनी, ट्रांस फैट और सोडियम व ज़्यादा कैलोरी वाला आरामदायक भोजन खाने लगती हैं| जो डायबिटीज़ और हाईपरटेंशन से पीड़ित लोगों के लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है|”

अच्छी सेहत के लिए सोलेबल और इनसोलेबल फाइबर से भरपूर आहार लें| जिसमें इसबगोल का छिलका, सेब और दालें मौजूद हों। इनसोलेबल में संपूर्ण अनाज, ब्रॉकली, सूखे मेवे, सीडज और वेजीटेबल स्किन शामिल होती हैं। फाइबर कई गंभीर बीमारियों से रक्षा करता है। फाइबर अपच सिंड्रोम में भी मदद करता है। उचित मात्रा में पानी पीने से ऊर्जा, मानसिक स्पष्टता और बेहतर पाचन बना रहता है। अपने दिन की शुरुआत नाश्ते से पहले आधा लीटर पानी पीकर करें और हर घंटे बाद उचित मात्रा में पानी पीते रहें।

कच्चे फल, सब्जियां, अंकुरित अनाज, सूखे मेवे, बीज और ताज़ा जड़ी बूटियां अपने आहार में शामिल करें। कच्चे आहार एनजाइम, विटामिन और रोग प्रतिरोधक एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करते हैं। खूब धूप सेकें। 80 से 90 प्रतिशत लोग विटामिन-डी की कमी से पीड़ित हैं, जो सर्दी के अवसाद, जोड़ों के दर्द, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी का कारण बनता है। इसलिए सर्दियों में काफी धूप लें।

अच्छे भोजन में सात रंग और छह स्वाद शामिल होते हैं। लाल सेब लाइकोपीन, हरी पत्तेदार सब्जियों और फलों में बी-कॉम्पलेक्स और नारंगी वस्तुओं से विटामिन-सी मिलता है। इसी तरह मीठे, कसैले और नमकीन स्वाद वज़न बढ़ाते हैं, तीखे, खट्टे और कड़वे स्वाद वज़न कम करते हैं। धूम्रपान छोड़ें! धूम्रपान वालों में अस्थमा और सांस की बीमारियां सर्दियों में आम हो जाती हैं, जो दिल के दौरे का खतरा भी बढ़ाती हैं।