(नए साल 2019 के पहले दिन सबरीमाला मंदिर में प्रवेश के अधिकार और 'लैंगिक समानता के समर्थन' में 620 किलोमीटर लंबी “वीमेन वॉल” बनाकर खड़ी केरल की 5 लाख महिलाएँ)
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तिरुवनंतपुरम (नेशनल डेस्क)।
ए साल के पहले ही दिन महिलाओं द्वारा अहिंसात्मक आन्दोलन का एक बेहतरीन उदाहरण तब देलहने को मिला जब केरल में पचास लाख महिलाओं ने ‘लैंगिक समानता के समर्थन’ में 620 किलोमीटर “वीमेन वॉल” यानी मानव श्रृंखला बनाया। महिलाओं की मांग थी कि सबरीमला मंदिर में दस से पचास साल की महिलाओं के प्रवेश करने पर प्रतिबन्ध की परंपरा को गैर-कानूनी घोषित करने वाले भारत की सर्वोच्च अदालत के फैसले के बाद लागू करवाया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं पर लगा ये प्रतिबंध तो हट गया लेकिन केरल के हिंदूवादी ताकतें जिनको भारतीय जनता पार्टी का सहयोग और संरक्षण प्राप्त है, महिलाओं के सबरीमला मंदिर जाने का विरोध कर रहीं हैं। जिन महिलाओं ने मंदिर जाने की कोशिश की उनपर हमले भी हुए। राज्य की वामपंथी गठबंधन सरकार ने ही इस मानव श्रृंखला ‘महिलाओं की दीवार’ का आयोजन किया है।

समाज में लैंगिक समानता को कायम रखने और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की हिफाजत के लिए केरल में महिलाओं ने 14 जिलों से होकर गुजरने वाले राजमार्गों पर मंगलवार को 620 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाई। राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित ‘वीमेन वॉल‘ अभियान में लेखक, एथलीट, कलाकार, नेता, सरकारी अधिकारी और गृहिणी सहित विभिन्न तबके की महिलाओं ने हिस्सा लिया। सबरीमला में सदियों पुरानी परंपरा का संरक्षण करने का संकल्प लेते हुए हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के अयप्पा ज्योति प्रज्जवलित करने और कासरगोड से कन्याकुमारी के बीच कतारबद्ध होने के कुछ दिनों बाद इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वहीं, पुरूषों ने भी महिलाओं के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करते हुए एक अन्य मानव श्रृंखला बनाई।

उच्चतम न्यायालय द्वारा अयप्पा मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने के निर्णय को माकपा नीत एलडीएफ सरकार के लागू करने के फैसले के बाद हुए विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में यह मानव श्रृंखला बनाई गई। गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने सभी आयु वर्ग की महिलाओं को अयप्पा मंदिर में पूजा अर्चना करने की इजाजत दी है। कार्यक्रम के आयोजक ने बताया कि धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और लैंगिक समानता की हिफाजत करने तथा समाज को अंधकार में ले जाने की कोशिश करने के वालों के खिलाफ संदेश फैलाने की पहल के तहत इसका आयोजन किया गया। कार्यक्रम के औपचारिक शुभारंभ से पहले मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने समाज सुधारक अय्यनकाली की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात और भाकपा नेता ऐनी राजा ने भी प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। स्वास्थ्य मंत्री के के शैलजा ने कासरगोड में महिला मानव श्रृंखला का नेतृत्व किया। सरकारी कर्मचारियों और टेक्नोपार्क कर्मचारियों को भी इसमें शामिल होने को कथित तौर पर कहा गया था, जिस पर मुख्य विपक्षी कांग्रेस नीत यूडीएफ ने इसे जातीय और विरोधाभासों की दीवार कहा।

सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध के खिलाफ लडाई की संक्षित कहानी : 
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी कि महिलाओं पर लगा ये प्रतिबंध लैंगिक समानता के मूल अधिकार का उल्लंघन करता है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ये प्रतिबंध हटाने का फ़ैसला सुनाया था लेकिन भारत की सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने इस फ़ैसले को हिंदू मूल्यों पर हमला बताया।

ये मुद्दा अप्रैल-मई में होने वाले आम चुनाव तक गर्म रहेगा। कई लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर धर्म के आधार पर बांटने की राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं। बीजेपी को हिंदू समर्थन वाली पार्टी कहा जाता है। अक्तूबर से ही महिलाएं मंदिर में प्रवेश की कोशिशें कर चुकी हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का विरोध कर रहे श्रद्धालुओं का एक वर्ग उनका रास्ता रोकता रहा है। इसमें भारतीय जनता पार्टी से लेकर कई संस्थाओं के कार्यकर्ताओं के शामिल होने के आरोप भी लगे हैं।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की आलोचना कर चुके हैं। अक्तूबर में केरल के कन्नूर में ज़िला भाजपा कार्यालय के उद्घाटन के समय उन्होंने कहा था कि देश की अदालतों को व्यावहारिक होना चाहिए और वैसे ही फ़ैसले देने चाहिए, जिन्हें अमल में लाया जा सके। उन्होंने कहा था कि भाजपा अयप्पा भक्तों के साथ खड़ी है।

नवंबर में जब सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने मंदिर में प्रवेश की कोशिश की थी तो कर्मा समिति नाम के एक दक्षिणपंथी समूह के कार्यकर्ताओं ने ही उन्हें देर तक कोच्चि एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलने दिया था। तृप्ति देसाई ने ही महाराष्ट्र के अहमदनगर में शनि शिग्णापुर मंदिर में प्रवेश करके महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की परंपरा तोड़ी थी।

गौरतलब
जहाँ एक ओर तीन तलाक मामले में केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अध्यादेश लाती है, वहीं सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़े हिंदूवादी संगठनों सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुलेआम उलंघन कर रही है। यह देश की की सर्वोच्च अदालत के फैसले के अवमानना का मामला भी है।